पिछले साल अक्टूबर में विदेशी निवेशकों द्वारा शुरू हुई बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है

FIIS (Foreign Institutional Investor) प्रतिदिन भारतीय शेयर बाज़ार में औसतन 1000 करोड़ ये उससे ज्यादा की बिकवाली कर रहें हैं

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे तनाव, लगातार बढती महंगाई, ब्याज दर का बढ़ना और डॉलर के मुकाबले रूपये का कमजोर होना एक बड़ी वजह मानी जा रही है

NSDL द्वारा जारी किये गए डाटा के आधार पर FIIS ने अक्टूबर से अभी तक 8 महीनो में लगभग 2.5 लाख करोड़ रूपये ($32 billion) की बिकवाली की है

बिकवाली की दूसरी वजह शेयरों के ज्यादा वैल्यूएशन पर ट्रेड करना भी बताया जा रहा है 

यह बिकवाली भारतीय शेयर बाज़ार में ही नहीं बल्कि दुसरे विकासशील देश जैसे ताइवान, साउथ कोरिया जैसे देशों के शेयर बाज़ार में भी हो रही है 

CLSA की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में विदेशी निवेशकों ने ताइवान के बाज़ार से $28 billion और साउथ कोरिया से $12.8 billion निकाले हैं

इतनी बड़ी बिकवाली के बाद बाद भी भारतीय शेयर बाज़ार का इंडेक्स Nifty अक्टूबर से अभी तक सिर्फ 8% ही गिरा है 

जबकि निफ्टी की तुलना में दुसरे विदेशी बाज़ार चाहे US, China या फिर Europian बाज़ार ज्यादा गिरे हैं 

विदेशी निवेशकों की इस भारी बिकवाली को सीधे तौर पर हमारे Retail निवेशकों और घरेलु संस्थागत निवेशकों का टक्कर मिल रहा हैं

रिटेल और DIIS की खरीदारी भारतीय बाज़ार को पूरी तरह से support कर रही है और उसे गिरने नहीं दे रही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस Shock- absorbing का नाम दिया है 

FIIS के 2.2 लाख करोड़ की बिकवाली की तुलना में Retail और DIIS ने 2021 से 2022 तक भारतीय बाज़ार में 2.1 लाख करोड़ रूपये का निवेश किया है