लम्बे समय से सरकारी कंपनी BPCL के विनिवेश की प्रक्रिया लंबित थी जिसे अब सरकार ने ख़ारिज कर दिया है

दरअसल मार्च 2020 में ही सरकार ने घोषणा की थी की वो BPCL में अपनी हिस्सेदारी जो 53% के करीब थी उसे बेचेगी

इसके लिए strategic Investment के तहत बोलिया मंगाई गयी थी

Strategic investment के तहत पूरी हिस्सेदारी किसी एक निवेशक को पूरी तरह बेचीं जाती है 

BPCL में सरकार की हिस्सेदारी खरीदने के लिए तीन निवेशको ने अपनी दिलचस्पी दिखाई थी जिनमे Vedenta group के अनिल अग्रवाल का भी नाम था

लेकिन अब जानकारी मिली है कि इन तीन में से 2 funds इससे पीछे हट रहे हैं 

उन्होंने कहा है वर्तमान में energy सेक्टर के हाल को देखते हुवे आने वाले समय के लिए इस सेक्टर में निवेश करना सही नहीं है, इसलिए हम इस विनेश में हिस्सा नहीं ले पाएंगे

इसलिए सरकार ने फ़िलहाल BPCL को बेचने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है