Making of Infosys -कैसे बनी Infosys भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी – Investandearn.net

क्या आप जानते हैं भारत के दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी infosys के founder Narayan Murthy को IIT में 17th रैंक लाने के बावजूद भी IIT Kanpur में उनका एडमिशन नहीं हो पाया क्योकि उनके पास फ़ीस भरने के लिए पैसे नहीं थे बाद में जाकर इन्होने देश के दुसरे सबसे बड़े IT कंपनी infosys की स्थापना की |

आइये जानते है infosys के बनने की कहानी, और इस कंपनी को बनाने में नारायण मूर्ति को कौन- कौन सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा |

शुरुवाती जीवन

नारायण मूर्ति का पूरा नाम नागवारा रामाराव नारायण मूर्ति है, इनका जन्म एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुवा था, इनके पिता एक गणित के शिक्षक थे जिनकी मासिक आय करीब 250 रूपये हुवा करती थी जिसकी मदद से वे अपने परिवार के 11 लोगों का पेट भर पाते थे |

नारायण मूर्ति बचपन से ही पढने में काफी हुसियार थे परन्तु जब उन्हें IIT में टॉप रैंक मिलने के बाद भी एडमिशन नहीं मिला तो वे निराश हो गए, लेकिन अपने पिता के समझाने के बाद उन्हें हिम्मत मिली, और उन्होंने कर्नाटका के इंजीनियरिंग कॉलेज से Electrical Engineering (B Tech) में डिग्री हासिल की |

अपने कॉलेज में टॉप करने के कारण इन्हें scholarship के बदौलत IIT Kanpur में MTech करने का मौक़ा मिला | MTech की पढाई पूरी करने के बाद इनके पास कई कंपनियों से नौकरी के लिए ऑफर आने लगे थे |

नारायण मूर्ति की पहली नौकरी (First Job)

उसके बाद इन्होने IIM को ज्वाइन किया जहाँ उन्हें कंप्यूटर का बेसिक काम था और उनका वेतन 800 रूपये था | यह पहली बार था जब उन्हें कंप्यूटर के दर्शन हुवे थे, वहाँ पर अपने 3 साल के काम के दौरान इन्हें बहुत कुछ सिखने को मिला, कंपनी में बाहर से आने वाले लोगो से ये मिलते थे और जानकारी हासिल करते थे और अपने रिसर्च रिपोर्ट में सभी जानकारियां लिखा करते थे |

उसके बाद एक French कंपनी SESA ने इन्हें अपने कम्पनी में काम करने का ऑफर दिया | इन्होने इस कंपनी को ज्वाइन कर लिया, वहां इनका काम था Peris Airport पर Computerized Cargo का design और installation करना | इन्होने इस कंपनी में 1974 तक काम किया, और कमाए गए सारे पैसे दान कर दिए, और भारत आ गए |

कारोबार की शुरुवात

भारत आने के बाद उन्होंने SRI नाम से एक business की शुरुवात की, उसके बाद उनकी मुलाकात सुधा कुलकर्णी से हुई जो बाद में उनकी धर्म पत्नी बनी |

सुधा कुलकर्णी के बारे में रोचक प्रसंग

आपको जानकारी के लिए बता दे सुधा कुलकर्णी भी बंगलौर के एक छोटे से टाउन की थी और उस समय वह अपने टाउन की पहली लड़की थी जिसने engineering की डिग्री हासिल की थी | सुधा कुलकर्णी जी ने अपनी पढाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए एक इश्तेहार देखा, जो इश्तेहार उस समय की Tata ग्रुप के एक वाहन बनाने वाली कंपनी Telco के द्वारा दिया गया था जिसमे लिखा था यहाँ महिलाएं आवेदन न करने | इस बात से वे खफा हो गई और उन्होंने JRD Tata को एक पत्र लिखा, जिसमे कहा अगर Telco महिलाओं को नहीं रखता तो इसमें कंपनी का ही नुक्सान है |

JRD Tata को उनका आत्मविश्वास सही लगा और उन्होंने उन्हें interview के लिए बुलाया और इस तरह से वे वाहन निर्माता कंपनी टेल्को की पहली महिला employee बनी |

नारायण मूर्ति के द्वारा स्थापित पहली कंपनी SRI फेल हो गई काफी नुक्सान उठाने के बाद उन्होंने उसे बंद कर दिया |

Infosys की शुरुवात

उसके बाद उन्होंने 1977 में मुंबई का रुख किया और दूसरी कंपनी ज्वाइन की जिसका नाम था Patni Computer Services, जहाँ ये general manager के पद पर थे | यह कंपनी उनके लिए एक game changer होने वाली थी क्योकि यही पर उनके बाकि की सभी साथी मिले जिन्होंने आगे चलकर दिग्गज infosys के नीव डाली |

Patni computer सर्विसेज ज्वाइन करने के बाद उनका विवाह सुधा कुलकर्णी जी से हो गया | कंपनी में ही उनकी मुलाकाल नंदन निलेकनी (Nandan Nilekani) जी से हुई इन्होने ही आधार कार्ड के कांसेप्ट को सबसे पहले सामने लाया था |

पाटिल कंप्यूटर में बहुत ही पुराने computer technology पे काम हो रहा था, और इन्होने आने वाले समय को भाप लिया था, इन्हें लगने लगा था की आने वाले समय में आईटी सेक्टर में उबाल आने वाला है और इन्होने कंपनी में ही 7 लोगों की team बनायीं और एक अलग आईटी कंपनी बनाने की सोची|

लेकिन इनके सामने सबसे बड़ी बाधा थी पैसों की, इन सभी में किसी के पास भी इतने पैसे नहीं थे की ये नयी कंपनी की शुरुवात कर सके |

लेकिन नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा कुलकर्णी ने कंपनी शुरू करने के लिए अपने पास से 10,000 रूपये दिए, और तक जाकर infosys की शुरुवात हुई |

Infosys की शुरुवात के बाद नारायण मूर्ति ने कुछ नियम बनाए और कहा सभी सख्ती से इसका पालन करेंगें –

उन्होंने कहा किसी भी प्रकार के decision में किसी ख़ास सदस्य के बदले infosys को प्राथमिकता दी जाएगी |

उनका दूसरा नियम था की हमेशा वे कंपनी के long term goal पे काम करेंगे न की short term पे |

तीसरे नियम के तहत उन्होंने कंपनी के खर्चे को व्यक्तिगत खर्चों से अलग करके रखा |

शुरुवाती दिनों में infosys का सारा काम नारायण मूर्ति के घर पर ही चलता था नारायण मूर्ति और नंदन निलेकनी अपनी पत्नियों के साथ एक अपार्टमेंट में साथ में ही रहते थे जहाँ वे और उनकी team दिन भर काम करते थे और उनकी पत्नियाँ अन्य काम जैसे साफ़- सफाई, चाय – नास्ते इत्यादि में मदद किया करती थी |

उस समय भारत में इतनी बड़ी कंपनियां नहीं थी जो इनके सर्विसेज को ले पायें इसलिए उन्होंने USA के कंपनी को target करने का सोचा, लेकिन इनके सामने समस्या थी की उन्हें USA के domestic कंपनियों से कम्पटीशन लेना था लेकिन इनके पास एक प्लस पॉइंट ये था की भारत में ये सस्ते में software बना सकते थे जिन्हें USA या दुसरे बड़े देशों में बनाने का खर्च बढ़ जाता था |

Business लेने के लिए इनकी team के कुछ सदस्य विदेशों में जाकर client के मिला करते थे और कंपनी के खर्च को कम करने के लिए वहां वे रोड पर पैदल चला करते थे यहाँ तक कि पैसे बचाने के लिए एक ही कमरे में रहा भी करते थे |

अब infosys के लिए काम आने लगे और infosys दुसरे कंपनियों के लिए software बनाने लगी |

Software बनाने के सन्दर्भ में भी नारायण मूर्ति ने कुछ नियम बनाये –

उनके अनुसार वो जिस भी कंपनी के लिए software बनायेगे वो पूरी तरह से उस client के निर्देश के अनुसार बनाया गया हो जिससे वो इस software से पूरी तरह संतुष्ट हो |

दूसरा उनकी प्राथमिकता थी की वो ऐसे software बनाये जिसे पूरी दुनिया में use किया जा सके |

Infosys के लिए नए कर्मचारियों की भर्ती

1982 में इन्होने अपनी कंपनी infosys में सबसे पहले IIT Chennai के तीन इंजिनियर को काम दिया, उस समय तक infosys इनके घर से ही चलता था, और वे इंजिनियर यह देखकर हैरान रह गए |

Infosys मुंबई से बंगलौर

1983 में इन्होने infosys को बंगलौर में स्थापित किया, क्योकि मुंबई उस समय बंगलौर की तुलना में काफी महंगी जगह थी , इस प्रकार infosys बंगलौर की पहली IT कंपनी बनी |

दूसरा कारण था की इनके एक client की डिमांड थी की वो Banglore में अपना कामकाज स्थापित करे |

आप को यह जानकर हैरानी होगी की तीन सालों तक इनकी कंपनी के पास अपना कंप्यूटर नहीं था, जिसका कारण था उस समय भारत में लाइसेंस राज था बहार से एक कंप्यूटर मंगाने के लिए आपको बहुत सारे लाइसेंस बनवाने पड़ते थे जो इनके लिए बहुत मुश्किल था |

बाद में जाकर 1984 में इन्होने अपनी कंपनी में अपना पहला कंप्यूटर स्थापित किया , अपने client से बात करने के लिए ये PCO से जाकर बात किया करते थे, इन्हें अपने कंपनी में टेलीफोन स्थापित करने में 1 साल लग गए |

आपको जानकर हैरानी होगी की यह अपने एक Jerman  client Mico के डायरेक्टर से मिलने के लिए स्कूटर से जाते थे और Mico का डायरेक्टर यह देख हैरान हो जाते हैं की इतनी बड़ी कंपनी का मालिक इतने साधारण तरीके के रह रहा है , और यही नहीं आज भी नारायण मूर्ति जी बेहद ही सादा जीवन जीते हैं |

नारायण मूर्ति हर उस तरीके का इस्तेमाल कर रहे थे जिससे इनकी कंपनी के खर्चे को ज्यादा से ज्यादा कम किया जा सके |

 संघर्ष के दिन

infosys को मुंबई से बंगलौर ले जाने के बाद इनको अपना पहला USA client मिल गया था जो था Data Basics corporation जिसके लिए ये software बना रहे थे, और इस के कारण उन्होंने USA california में अपना एक office स्थापित किया जिससे वहां से ये client लेकर भारत आ सके | अभी इसी जगह पर california में  Infosys का USA headquarter भी स्थापित है |

साल 1989 का समय infosys और नारायाण मूर्ति के लिए सबसे चुनौती भरा होने वाला था क्योकि इनके एक team के सदस्य अशोक अरोरा ने कंपनी छोड़ दिया और वे USA की एक दूसरी कंपनी से जुड़ गए | दूसरी तरफ इनका USA की एक कंपनी KSA का साथ गठबंधन था और वो कंपनी इसी साल दिवालिया हो गयी जिसके चलते सारा बोझ infosys पर आ गया और इनके सभी fund भी ख़त्म हो चुके थे क्योकि इनकी पार्टनर कंपनियां फ़ैल हो गयी थी |

इस समस्या से निकलने के लिए नारायण मूर्ति ने बंगलौर के अपने office में अपने सभी team के सदस्यों की metting बुलाई जिसमे infosys के संस्थापक सभी सदस्य मौजूद थे और सभी से पूछा गया की अब क्या करना चाहिए सभी ने विचार कर बताया की अब Infosys को बेच देना चाहिए और उस समय infosys को 1 milion डॉलर की वैल्यूएशन भी मिल रही थी, सबने कहा ये एक अच्छी डील होगी |

लेकिन अंत में सभी की बात सुनने के बाद नारायण मूर्ति ने इस कंपनी को बनाने में जो कठिनाइयाँ हुई उनके बारे में बताया और कहा की हम किस तरह जमीन से उठकर इस पायदान तक पहुचे है, मैं इस कंपनी को नहीं बेचूंगा चाहे जो हो जाये, आप बेचना चाहते हैं तो अपने हिस्से के पैसे ले लीजिये |

नारायण मूर्ति की इस बात ने पुरे team के सदस्यों में एक नई जान फुक दी और अगले दो साल तक कंपनी के सभी सदस्यों ने पूरी मेहनत के साथ काम किया |

बड़ी कंपनी बनने की शुरुवात

सन 1991 में भारत में liberalization की शुरुवात होती है और लाइसेंस राज को ख़त्म कर दिया जाता है जिसके परिणामस्वरूप विदेशी कंपनियां भारत में आने लगती हैं और इनके लिए उनसे संपर्क करना आसान हो गया | और इन्होने General Electrics, Nortel जैसी शुरुवाती कंपनियों के लिए software बनाये |

दुनिया तेजी से बदल रही थी 1990 तक Hardware और Software की जो भी जरुरत थी वो USA, जेर्मनी और जापान पूरा कर रहे थे लेकिन ये देश हार्डवेयर पर ज्यादा फोकस कर रहे थे |

नारायण मूर्ति ने सोचा एक ऐसी team का गठन किया जाये जो आने वाले समय में software सम्बंधित सभी कार्यों को पूरा कर सके | 1991 के बाद software की demand बहुत तेजी से बढ़ने लगी |

अगर आकड़ो को देखें 1990 के बाद जिन कंपनियों ने हार्डवेयर में पैसे लगाये, हार्डवेयर का ग्रोथ rate सिर्फ 6% रहा है जबकि software का growth rate 15% का रहा है |

और infosys पूरी तरह से एक Software बनाने वाली कंपनी थी | जिसके चलते दुनिया की बड़ी कंपनियां USA और जापान छोड़ कर software के लिए भारत जैसे  देशों की और आने लगी |

USA  में जहाँ उन्हें जिन software के लिए ज्यादा कीमत देनी पड़ती थी वो भारत में कम कीमत में बन जाती थी और यहाँ के engineers को भी वे सस्ते वेतन पर ज्वाइन करवा लेते थे |

इसी दौर में भारत में टेलिकॉम सेक्टर भी तेजी से ग्रो कर रहा रहा था और इन्टरनेट data पहले की तुलना में कुछ सस्ते मिलने लगे थे |

इन सभी चीजो का फायदा एक साथ software industry को होने वाला था | साथ ही 1991 में भारत सरकार ने software industry के विस्तार करने के लिए उसमे भारी – भरकम निवेश भी किया | जिसके चलते 1991 से 1997 तक भारत में software industry 50 फीसदी से ज्यादा की growth rate से बढ़ी |

नारायण मूर्ति ने अपने एक interview में भी कहा है ये एक ऐसा समय था जब सभी चीजें उनके favour में होने लगी और उन्होंने इस मौके का अच्छी तरह से फायदा उठाया |

अब भारत की टॉप 6 IT कंपनियां दुनिया की लगभग 60% से ज्यादा की  software की जरूरतों को पूरा कर रही थी | जो थी टाटा की  TCS, Infosys, Wipro, NIIT, Mastek और Satyam

Infosys IPO

1993 में Infosys अपना ipo लेकर आई थी जिसकी कीमत 95 रूपये थी |

कंपनी का विस्तार

इसके बाद नारायण मूर्ति ने अलग- अलग सेक्टर के लिए software बनाने शुरू कर दिए जैसे Banking, Telecom, Energy, Aerospace, Hitech System, Insurance, Entertainment, Healthcare, retail, distribution इत्यादि |

बाद में infosys ने बंगलौर में 5 एकड़ में अपना सबसे बड़ा headquarters बनाया जो किसी ज़माने के एक बेडरूम से शुरू हुई थी |

साल 1999 infosys के लिए बहुत भी महत्वपूर्ण साल रहा क्योकि इस साल कंपनी ने 100 milion डॉलर कमाए थे |

इसके बाद infosys ने पीछे मुड़कर नहीं देखा अब नारायण मूर्ति अपने कंपनी के विस्तार पर काम कर रहे थे वे दुनिया के हर बड़े शहर में अपना sales office खोलते जा रहे थे | इन्होने भारत में कई शहरों में अपने training centre खोले हैं जहाँ लाखों बच्चों को training दी जा चुकी है |

इस समय भारत में बहुत सारी software बनाने वाली कंपनियां आ चुकी हैं, लेकिन infosys ने अपने आपको उनसे अलग करने के लिए अपने प्रोडक्ट की quality pe ध्यान देना शुरू किया और इसके लिए उन्होंने कंपनी में कई योजनाओं बनायीं |

इसके अलावे infosys ने zero defect policy पर भी काम करना शुरू किया जिसके चलते इन्हें 1993 में ISO 9001 सर्टिफिकेट से भी सर्टिफाइड किया गया |

उसके बाद 1994 में इन्हें CMMl4 से authorize किया गया जो दुनिया की मात्र 2 फीसदी कंपनियों के पास ही है जिसका मतलब होता है वो कंपनियां बहुत अच्छा परफॉर्म कर रही हैं |

Infosys भारत में अपने employee को अपने तरीके से training देती है , वे अपने interview में खास तौर पर वैसे लोगो का चयन करती है जिनके सिखने की क्षमता ज्यादा हो , जो team के साथ मिलकर काम कर सके, और जो रिस्क लेने से न डरता हो |

Infosys ने दुनिया में जगह-जगह अपने sales center खोल रखे हैं जिनके द्वारा वे वहां से प्रोजेक्ट उठाते हैं और भारत में training दिए हुवे अपने employee से काम करवाते हैं जिससे इन्हें समय के साथ – साथ पैसो की बचत भी होती है जिससे उनको कंपनी के खर्चो को कम करने में भी मदद मिलती है |

इसका एक और फायदा उन्हें मिला की समय के साथ उनके कंपनी का मार्जिन भी बढ़ता गया |

साल 2012 तक Infosys के पास 1.50 लाख से ज्यादा employee थे और इसका market कैप 30 बिलियन डॉलर से ज्यादा था |

वर्तमान में (2022 तक) कंपनी के पास 2 लाख 90 हज़ार के आस – पास employee मौजूद है , जो हमेसा कंपनी की हित में काम करते हैं |

नारायण मूर्ति ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर infosys foundation के द्वारा बहुत सारे दान भी दिए हैं |

अगर हम शुरू से देखे तो वो कंपनी जो 10000 से शुरू हुई थी आज उसका market कैप 8 लाख करोड़ रूपये हो चूका है और इस समय ये भारत की दूसरी सभी बड़ी IT कंपनी बन चुकी है |

प्रश्न – उत्तर (FAQ)

Infosys के संस्थापक कौन हैं ?

Infosys की स्थापना नारायण मूर्ति ने नंदन निलेकनी और कुछ अन्य सदस्यों के साथ की जिसमे कुल 7 सदस्य शामिल थे |

Infosys की स्थापना कब हुई ?

Infosys की स्थापना 1981 में हुई |

Infosys कब अपना ipo लेकर आई ?

साल 1993 में Infosys का ipo आया था जिसमे इसके एक शेयर की कीमत 95 रूपये थी |

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